हिंदू धर्म में भगवान हनुमान को अत्यंत बलवान, बुद्धिमान और भक्त माना जाता है। उनकी असाधारण शक्तियों और निष्ठा की कहानियाँ सदियों से लोगों को प्रेरित करती रही हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस महाबली की शिक्षा का स्रोत कौन था? जी हां, हम बात कर रहे हैं सूर्य देव की, जिनकी कृपा से हनुमान जी ने अद्वितीय शक्तियाँ प्राप्त कीं। आइए जानते हैं इस गुरु-शिष्य के अनूठे संबंध की कहानी।
सूर्य देव की कृपा से बलवान

पौराणिक कथाओं के अनुसार, हनुमान जी का जन्म अनजाने में हुआ था। वायु देव ने अपनी शक्ति से एक पत्थर को जीवन दिया था, जिससे हनुमान जी का जन्म हुआ। बचपन से ही हनुमान जी अत्यंत बलवान थे। वे अक्सर गांव वालों के बच्चों के साथ खेलते थे और अपनी शक्ति का प्रदर्शन करते थे। एक दिन, उन्होंने सूर्य देव को एक फल समझकर उसे पकड़ने के लिए उड़ान भरी। सूर्य देव हनुमान जी की इस अद्भुत शक्ति से चकित हो गए। उन्होंने हनुमान जी को रोकने के लिए अपनी तेज किरणें छोड़ीं, लेकिन हनुमान जी उन किरणों को भी पकड़ने लगे।
सूर्य देव की शिक्षा

सूर्य देव हनुमान जी की इस अद्भुत शक्ति और दृढ़ इच्छाशक्ति से प्रभावित हुए। उन्होंने हनुमान जी को अपनी शरण में ले लिया और उन्हें अपनी अद्भुत शिक्षा प्रदान की। सूर्य देव ने हनुमान जी को अनेक योग साधनाएं सिखाईं, जिनसे हनुमान जी की शारीरिक और मानसिक शक्ति में अत्यधिक वृद्धि हुई। उन्होंने हनुमान जी को अमरत्व का वरदान भी दिया।
ज्ञान और शक्ति का संचार

सूर्य देव ने हनुमान जी को न केवल शारीरिक शक्ति, बल्कि अनेक प्रकार के ज्ञान भी प्रदान किए। उन्होंने हनुमान जी को वेद, पुराण, योग, ज्योतिष और अनेक विद्याएं सिखाईं। सूर्य देव की शिक्षा से हनुमान जी एक महान योद्धा और विद्वान बन गए। उन्होंने अपने जीवन में अनेक कठिन चुनौतियों का सामना किया और सफलतापूर्वक उनका निवारण किया।
हनुमान जी की निष्ठा

हनुमान जी ने अपने गुरु सूर्य देव की सेवा में अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया। उन्होंने सूर्य देव की आज्ञा का पालन किया और उनकी सेवा में सदैव तत्पर रहे। उनकी निष्ठा और भक्ति से प्रभावित होकर सूर्य देव ने उन्हें अनेक वरदान दिए।
हनुमान जी की कहानी हमें सिखाती है कि गुरु की शिक्षा और आशीर्वाद से कोई भी व्यक्ति महान बन सकता है। हनुमान जी ने अपने गुरु सूर्य देव की शिक्षा को ग्रहण किया और उनकी सेवा में अपना जीवन समर्पित कर दिया, जिससे वे एक महान योद्धा और भक्त बन गए। उनकी कहानी हमें प्रेरित करती है कि हम भी अपने गुरुओं का सम्मान करें और उनकी शिक्षा को ग्रहण करें।
इस प्रकार, हनुमान जी ने सूर्य देव को अपना गुरु चुना और उनकी शिक्षा से अद्वितीय शक्तियाँ प्राप्त कीं। उनकी कहानी हमें गुरु-शिष्य के संबंध की महत्ता और निष्ठा के महत्व को समझाती है।
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